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एक घटै ही घटै है……

Byuser

Jul 16, 2021

एक नगर में एक मालदार करोड़पति साहूकार रहता था , वहां के राजा की उस साहूकार के धन पर नजर थी | राजा ने सोचा किसी युक्ति से साहूकार का धन लिया जाए ऐसा सोचकर राजा ने उस साहूकार को अपने पास बुलाया और बोला  हमें चार चीजों की बहुत दरकार है इसलिए ये चारों चीजें शीघ्र ही लाकर दें | साहूकार के पूछने पर राजा ने बताया पहली जो घटै ही घटे है ,दूसरी बढे ही बढे है तीसरी न घटे ना बढे है और चौथी घटे भी है और बढे भी है | साहूकार ने 6 महीने की मौहलत ले ली राजा ने साहूकार से लिखवा कर ले लिया कि यदि 6 महीने के अंदर ये चीजें लेकर नहीं दी तो साहूकार की सारी संपत्ति सरकार की हो जायेगी |
साहूकार ने अपने सारे नुमाइंदे इन चीजों को खोजने में लगा दिए और कहा 6 महीने से पहले इन चीजों को कंही से भी लाकर दो लेकिन सभी जगहों से एक ही उत्तर मिला की ऐसी कोई चीज नहीं मिलती है |
अब तो साहूकार बड़े सोच में पड गया वह दिन रात चिंता करने लगा ,साहूकारनी ने देखा साहूकार को कोई चिंता खाये जा रही है साहूकारनी ने साहूकार से उसकी चिंता का कारण पूछा बहुत पूछने पर साहूकार ने सारी बातें बता दीं | पति की बात सुनकर पत्नी ने कहा ये सारी चीज तो मेरे बक्शे में बंद पड़ी हैं ,साहूकार ने उन्हें देखना चाहा तो उसने बोला आप राजा को कहलवा दें कि ऐसी ऐसी चीजें तो महिलाओं के पास मिल जाती हैं |
साहूकार ने जब राजा को बताया तो राजा ने उसी बक्त साहूकारनी को दरवार में आने के लिए बुलाबा भेज दिया | साहूकारनी ने कहा कि वह अपनी किसी बिश्बस्त बांदी को भेज दें मैं उसे ये चारों चीजें दे दूंगी | लेकिन राजा को तो जल्दी लगी थी उसने इतनी देर में ही चार बार हरकारे भेज दिए | तब साहूकारनी ने एक थाल में दूध का कटोरा भर कर रख लिया उसमें कुछ मोंठ ,कुछ चने और थोड़ी सी दूब रखकर दरवार में हाजिर हो गई |
साहूकारनी ने दूध का कटोरा राजा के आगे और थोड़ी दूब ,मोंठ ,चने सभी दरवारियों के आगे रख दिए | राजा ने कहा कि तू मेरी धर्म की बेटी है इसलिए बिना संकोच के बता तूने ये क्या किया है |
साहूकारनी ने कहा अन्नदाता पहले आप अपनी चार चीजें ले लीजिये फिर बताउंगी | आपकी पहली चीज उम्र है जो घटे ही घटे है दूसरी चीज तृष्णा है जो बढे ही बढे है | तीसरी चीज कर्म की रेखा है जो न घटती है और न बढ़ती है | चौथी चीज है सृष्टि जो घटती भी है और बढ़ती भी है | राजा ने साहूकारनी की चारों  बात से सहमति जताई और बोला मुझे चारों चीजें मिल गईं अब ये बता तूने ये क्या किया था ? साहूकारनी ने जबाब दिया महाराज आपके दरवार में सब डांगर बैठे हैं किसी ने आपसे यह नहीं कहा कि एक सम्मानित करोड़पति की पत्नी को भरे दरवार में इस प्रकार बुलाना अनुचित है और अन्नदाता आप निरे बच्चे हैं | आपने भी कुछ बिचारा नहीं इसलिए आपके सामने दूध का कटोरा और दरवारियों के आगे घास ,चने,मोंठ रखे थे | आप हमारे मालिक हैं इसलिए आपसे कुछ कह नहीं सकती | राजा और सब दरवारियों का सिर लज्जा से झुक गया |
शिक्षा :- दूसरे के धन पर नजर रखना उचित नहीं है | नारी के सम्मान का हमेशा ख्याल रखें |

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