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अब तो आठों पहर रोना ही रोना है

Byuser

Jul 22, 2021 ,

एक ग्वाला था वह नित्य प्रतिदिन बकरी चराने जंगल में जाया करता था | कुछ दिनों से एक बकरी उसकी बकरियों में मिल जाती और शाम होते ही अलग होकर चली जाती | ग्वाले ने सोचा इसका पता करना पड़ेगा कि यह कहाँ जाती है | यही सोचकर वह उस बकरी के पीछे हो लिया उसने देखा बकरी एक गुफा के अंदर जा रही है वह भी डरते डरते गुफा के अंदर घुस गया ,तो उसने देखा वहां एक साधु तपस्या कर रहा था बकरी वहीं जाकर रुक गई | साधु ने ग्वाले को देखा तो सोचा बकरी की चराई लेने आया है उसने धूनी से एक मुठ्ठी राख ली और ग्वाले को देकर कहा जा अब तेरे किसी बात की कमी नहीं रहेगी ,लेकिन ध्यान रखना ये बात किसी को मत बताना |


ग्वाला घर आया तो उसने देखा उसकी झोंपड़ी एक आलिशान महल बन गई जिसमें नौकर चाकर सब सुबिधायें थीं |उसके ठाठ बाट देखकर लोग ईर्ष्या करने लगे और सोचते यह इतना धनवान कैसे बन गया | ग्वाले ने घोषणा करवा दी कि यदि किसी ने उसके राजसी ठाठ बाट के बारे में पुछने की कोशिश की तो वह उसे मरवा देगा | इसलिए कोई उससे कुछ भी नहीं पूछता था |इतने ठाठ बाट के वावजुद ग्वाला एक पहर रोता था | उसके पड़ोस में ही एक बृद्ध रहता था वह ग्वाले के प्रतिदिन एक पहर रोने का कारण जानना चाहता था उसने सोचा वह अब इतना बृद्ध हो चूका है कि कभी भी मर सकता है इसलिए ग्वाले से वह पूछकर ही रहेगा कि वह एक पहर रोता क्यूँ है |बृद्ध के पूछने पर ग्वाले ने कहा इस बात का रहस्य तो मेरे गुरूजी ही बता सकते हैं | बृद्ध ने उसकेगुरु का पता पूछा और जाकर देखा कि ग्वाला जहाँ एक पहर रोता है वहीँ उसका गुरु दो पहर रोता है | उसने उस महात्मा से पूछा तो उसने जबाब दिया कि तुम  मेरे गुरु के पास जाओ वही तुम्हें बताएँगे | बृद्ध उसके गुरु के पास गया तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि महात्मा का गुरु तीन पहर रोता है | बृद्ध के पूछने पर उसने उसे अपने गुरु के पास जाने को कहा जो चार पहर रोता है | बूढ़े के पूछने पर उस महात्मा ने उसे चार संदूक देते हुए कहा कि इन्हें सॅभाल कर रखना तब तक में अपने गुरु के पास जाकर आता हूँ लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि किसी भी हालत में संदूक खोलकर मत देखना | जिज्ञासाबश पहली खोल भी ली तो दूसरी मत खोलना ,यदि दूसरी खोल भी ली तो तीसरी मत खोलना और यदि तीसरी खोल भी ली तो चौथी तो हरगिज मत खोलना | ऐसा कहकर महात्मा वहां से चले गए | महात्मा के जाने के बाद बूढ़े को संदूक खोलने की धुन सवार हुई उसने पहला संदूक खोला तो उसमें से एक सफ़ेद हाती बाहर आया और उसने कहा तुम मेरी पीठ पर सवार हो जाओ मैं तुम्हें कैलाश की सैर करा लाता हूँ | बूढ़ा हाती पर बैठा और हाथी ने कुछ ही समय में बूढ़े को कैलाश की यात्रा करा दी उसे प्रत्यक्ष शंकर भगवान ,गणेश जी के दर्शन हुए | उसका पूरा शरीर रोमांच से भर गया | कुछ देर बाद हाथी ने कहा अब बापिस चलो | बूढ़ा हाथी पर सवार हुआ और बापिस अपनी जगह आ गया बूढ़े ने संदूक खोली और हाथी उसमें बंद हो गया , तो बूढ़े ने बक्शा का ताला लगा दिया |
अब बूढ़े ने दूसरा बक्सा खोला उसमें से ऐक  दिव्य घोडा निकला जिसने बूढ़े को स्वर्ग की सैर कराई और बापिस वहीँ आ गया | घोडा भी बक्से में समां गया और बूढ़े ने उसका भी ताला लगा दिया |
अब बूढ़े ने तीसरा संदूक खोला और उसमें से गरुड़ निकले जिसने बूढ़े को विष्णुलोक की यात्रा कराइ और वापिस वहीँ आ गया और संदूक में चला गया | बूढ़े ने तीसरे संदूक का भी ताला लगा दिया |
अंत में बूढ़े ने चौथा संदूक भी खोल दिया उसमें से एक गधा निकला उसने कहा में तुम्हें तुम्हारे माता पिता ,भाई ,पत्नी इत्यादि से मिला सकता हूँ लेकिन वहां तुम्हें इस बात का ख्याल रखना होगा कि एक पहर से ज्यादा समय ना लगे नहीं तो मैं तुम्हें वहां से बापिस नहीं ला पाऊंगा | बूढ़े ने कहा ठीक है और गधे पर सवार हो गया थोड़ी देर में ही गधा उस लोक में पहुँच गया जहाँ उसके सगे  सम्बन्धी थे | बूढ़ा अपने सम्बन्धियों से मिलने में बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसे गधे की बात याद ही नहीं रही और एक पहर की जगह तीन पहर निकल गए जब उसे गधे की बात याद आई तब तक गधा वहां से जा चुका था बूढ़ा हाथ मलमलकर पछताने लगा कि मैं कैलाश लोक गया , स्वर्गलोक गया और विष्णुलोक गया लेकिन वहां नहीं ठहरा और यंहा आकर इस जंजाल में फंस गया जहाँ से मेरा निकलना संभव नहीं है | बूढ़ा अब जोर जोर से रोने लगा और सोचने लगा ग्वाला एक पहर रोता था उसका गुरु दो पहर ,तीसरा साधु तीन पहर ,चौथा साधु चार पहर रोता था लेकिन मुझे तो अब नित्य आठों पहर रोना ही रोना है |
शिक्षा :- ज्यादा की लालसा में कभी कभी जो हासिल है उससे भी हाथ धोना पड़ सकता है | जिज्ञासा वश उस कार्य को नहीं करना चाहिए जिसके लिए उचित व्यक्ति द्वारा मना किया गया हो |

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