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सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं ..भाग-5

Byuser

Apr 12, 2021

अभी तक आपने पढ़ा की हरी पूरी रात जागकर स्क्रिप्ट  तैयार कर लेता है अब इससे आगे –

हरी अपने  घर से स्कूल जाने के लिए सुबह 7 बजे निकलता है उसने सोचा  अभी तो तीन ही बजे हैं क्यों ना थोड़ा आराम  कर लूँ |हरी अपने बिस्तर पर चला जाता है ,उसकी अलार्म में सुबह के 4 बजे की अलार्म फिक्स है और बह सही  04 बजे अपने बिस्तर से  खड़ा हो जाता है |जैसे ही घड़ी में 4 बजे अलार्म जोर से बजने लगी लेकिन इतनी तेज आबाज से भी हरी की आँख नहीं खुली कुछ तो रात भर जागने और कुछ इत्मीनान की नींद |हरी की माँ भी लगभग हरी के साथ ही उठ जाती है आज उसे हरी के  कमरे से रोशनी नजर नहीं आई तो उसने सोचा जरूर आज देर रात तक काम करता रहा होगा |

सुबह 6 बजे तक भी जब हरी उठकर नहीं आया तो उसकी माँ को चिंता  होने लगी ,क्योंकि यह पहला मौका है जब हरी इतनी देर तक सोता रहा है इसलिए वह उसकी चारपाई के पास जाकर हरी के सिर पर हाथ फिराते हुए कहती है कि हरी बेटा आज स्कूल नहीं जाना क्या ?माँ के सिर पर हाथ फिराने से हरी की जाग खुल जाती है उसकी नजर सीधे अलार्म घड़ी पर जाती है जो सुबह के 6 बजने का इशारा कर रही है |हरी एकदम से खड़ा हो जाता है मानो करेंट लगा हो |हरी चलते चलते माँ को कहता है माँ तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं और नित्य प्रतिदिन के काम निपटाने में लग जाता है हरी ने सभी काम बड़ी फुर्ती से किये थे फिर भी उसे तैयार  होने में 30 मिनट तो लग ही गए थे |बाकी बचे समय में वह स्क्रिप्ट को एक बार फिर से दोहराकर अपनी संतुष्टि कर लेना चाहता था |

ठीक 7 बजे हरी ने रोजाना की तरह अपने पिताजी और माँ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और स्कूल जाने को निकल जाता है आज हरी की उमंग सातवें आसमान पर है उसने पहली बार कुछ लिखा है और यदि मास्टरजी ने इसे पास कर दिया तो वह इस पर अभिनय भी करेगा |स्कूल पहुचने के बाद प्रेयर और उसके तुरंत बाद उन्हें सेंट्रल हॉल में ही पहुचना था जैसे ही प्रेयर खत्म हुई हरी दोड़कर सेंट्रल हॉल में पहुँच जाता है उसे तब बड़ी निराशा हुई की उसके अलाबा अभी तक वहाँ कोई दूसरा नहीं आया था तकरीबन 15 मिनट के इंतजार के बाद बाकी बच्चे वहाँ आते हैं और थोड़ी  देर में ही म्यूजिक टीचर भी आ जाते हैं |

टीचर जी को आते देख सभी बच्चे बेंच से खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं |मास्टरजी सभी की ओर मुखातिव होते हुआ कहते है की जिन बच्चों ने पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली  है वह अपना हाथ खड़ा करें |सभी बच्चों में से सिर्फ हरी का हाथ ही ऊपर था क्योंकि सच तो ये था बाकी बच्चों ने पहले दिन उस पर कोई काम ही नहीं किया था |

मास्टरजी हरी को कहते है हरी बेटा मुझे संतोष और खुशी है की तुमने गंभीरता दिखाते हुए अपना टास्क पूरा किया है |अब में तुम्हारी लिखी स्क्रिप्ट को तुम्हारे ही अंदाज में  अलग अलग कैरेक्टर में किस तरह बोला  जाएगा तुम्हारे मुहँ से  सुनना ही  चाहता हूँ |हरी ने अपने बेग से वह कॉपी निकाली जिसमें उसने स्क्रिप्ट लिखी थी |सबसे पहले उसने मास्टरजी से क्षमा मांगते हुए कहा मास्टरजी इसमें जो भी गलती हों उसके लिए पहले से ही क्षमा चाहता हूँ इसके बाद उसने भूमिका बांधते हुए कहानी के किरदारों का परिचय दिया उसके बाद सभी  किरदार के डायलॉग पढे और  जब उसने कहा यही नाटक का अंत है तभी म्यूजिक टीचर के साथ बाकी सभी बच्चे भी खड़े हो गए और ताली बजाकर हरी की हौसला अफजाई की ,मास्टर जी ने कहा हरी इस नाटक में एक भी शब्द जोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं है |(आगे की कहानी जानने के लिए अगला भाग पढ़ना ना भूलें )

 

 

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