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सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं-10

Byuser

May 3, 2021 , ,

अभी तक आपने  पढ़ा माधवी के समझाने के बाद भी हरी का पढ़ाई में मन नहीं लगा जिसके  कारण वह परिक्षा में फेल हो जाता है अब इससे आगे –

कक्षा 10 बोर्ड का ,परीक्षा का परिणाम देखकर हरी के टीचर बेहद निराश हैं उन्हें हरी से बड़ी आशाएं थी परीक्षा होने से कुछ दिन पहले तक हरी बहुत अच्छा कर रहा था लेकिन लास्ट में आकर ऐसा क्या हो गया कि वह फेल हो गया किसी के समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था |

माधवी ने हरी के साथ समय भी बिताया ,सपने भी देखे लेकिन साथ ही उसने अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान रखा इसी का परिणाम था कि जब उसका रिजल्ट आया तो बह बहुत अच्छे मार्कस के साथ पास हुई थी उसे अपने पास होने की कोई खुशी नहीं हुई उसे दुख इस बात का था कि हरी फेल हो गया था |

सबसे ज्यादा दुख हरी  की माँ को था फेल होने के बाद उसका बेटा बहुत चुप रहने लगा था वह समझ नहीं पा रही थी की आखिर ऐसी क्या बात हो गई  जो हरी का आचरण एकदम ही बदल गया | माँ ने हरी को बड़े प्यार से पूछा बेटा कोई भी परेशानी तुम अपनी माँ को  बेझिजक बता सकते हो  लेकिन हरी का मौन तोड़  पाने में बह असफल ही  रहती है |

परीक्षा  होने के बाद से  ही स्कूल   बंद थे रिजल्ट आने के बाद अब स्कूल  खुलने  लगे हैं और हरी का स्कूल भी कल से लगने वाला है हरी की उदासी का कारण भी यही था की इन दिनों बह माधवी से नहीं मिल पा रहा था उसे फेल होने का उतना दुख नहीं था वह जानता था कि उसने जब पढ़ा ही नहीं तो  रिजल्ट अच्छा कैसे आता |

आज वह स्कूल जाने वाला  है  आज हरी  इतना अधीर है कि रात के दो बज रहे हैं और चाँदनी रात को भोर का उजाला मानकर  वह नहा धोकर तैयार हो  जाता है उसे इतना भी होश नहीं है कि उसकी अलार्म भी अभी तक नहीं बजी है  ,तैयार  होने के बाद वह घड़ी पर नजर डालता है  तो देखता है की 2 बजकर 30 मिनट ही हुए हैं |

जैसे तैसे इंतजार के बाद उसके स्कूल का समय  होता है और बह स्कूल चला जाता है | स्कूल के ग्राउंड  में चारों ओर नजरें  दौड़ाने  बाद भी  माधवी उसे कहीं नजर नहीं आ रही थी जिससे उसकी व्याकुलता  और बढ़ती जा रही थी कुछ देर यूं ही चारों ओर तलाशने के बाद उसके कदम माधवी की क्लास की तरफ बढते चले जाते हैं |उसका अंदाजा सही था माधवी अपनी एक सहेली और बहन उमा के साथ क्लास में ही मौजूद थी हरी को गेट पर देख लेने के बाद भी उसने अनदेखा कर  दिया जबकि हरी उससे मिलने को  परेशान हुआ जा  रहा था |

अभी वह माधवी से मिलने की कोई तरकीब   सोच ही रहा था की माध्वी   की सहेली की नजर उस पर पड़ गई उसने आबाज देकर हरी  को अदर आने को कहा हरी कुछ  सकुचाता  हुआ क्लास के अंदर चला  गया|उसने माधवी से बात करने की बड़ी कोशिस की लेकिन हर वार माधवी ने उसे अनदेखा कर   दिया इससे आगे की कहानी अगले भाग मे –

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