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सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं ..भाग-7

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Apr 16, 2021

 

अभी तक आपने पढ़ा की नाटक के सभी पात्रों का अभिनय किस किस को करना है ये तय कर लिया गया है |दूसरे दिन स्कूल समय से एक घंटा पहले पहुंचना है ऐसा कहकर सभी को उनकी क्लासों में भेज दिया जाता है -अब आगे –

दूसरे दिन हरी एक  की बजाय दो घंटे पहले तैयार होकर अपनी मां के पैर छूते हुए कहता है माँ आज मुझे स्कूल में जल्दी पहुंचना है माँ ने हरी को ढेरों आशीर्वाद दिए और कहा ठीक है बेटा ,आराम से जाना ठीक है माँ कहकर हरी अपना थैला कंधे पर लटकाए आगे बढ़ जाता है |

स्कूल पहुंच कर देखताहै कि गेट पर ताला लटका है अपनी आतुरता पर बह स्वयं ही मुस्करा देता है ।अभी उसे स्कूल के  गेट पर खड़े कुछ ही समय बीता होगा की स्कूल का चौकीदार आता हुआ नजर आया  हरी सीधा सेंट्रल हॉल की तरफ बढ़ गया  उसने बिना कोई बक्त गवाये अपने डायलॉग रिवीजन करने लगा वह इनमें इतना मशगूल हुआ की कोई उसके  पास खड़े होकर डायलॉग सुन रहा है लेकिन उसे पता नहीं चला उसकी लय तब टूटी जब पीछे खड़ी उमा और मानवी ने उसके एक डायलॉग   पर जोरदार  तालियाँ बजाईं हरी बहुत शर्मिला लड़का है बिशेषकर लड़कियों से वह बहुत शरमाता है |

उमा ने हरी की  ओर देखकर कहा  हमारा तुम्हारा किरदार पति और पत्नि का है तुम इस तरह शर्माओगे तो कैसे चलेगा इस समय हरी का चेहरा देखने  लायक  था उमा ने कहा चलो दोनों मिलकर डायलॉग की प्रैक्टिस करते हैं थोड़ी देर तो हरी उमा से शरमाया फिर दोनों इतना घुल मिल गए की उन्हें लग ही नहीं रहा था की उनकी अभी अभी की मुलाकात है |

 

उमा और हरी के डायलॉग बोलने के अंदाज से लग रहाथा जैसे सच में ही कोई पति और पत्नि बात कर रहे हैं काफी समय प्रेक्टिस के बाद बाकी के बच्चे  भी आ चुके हैं और अपनी अपनी प्रेक्टिस में लग रहे हैं |मास्टरजी उन्हें मार्गदर्शन कर रहे हैं लेकिन जब वह हरी उर उमा के डायलॉग सुनते है तो उन्हें लगता है इससे अच्छा तो कुछ और हो ही नहीं  सकता|वे बड़े ध्यान से उन दोनों के बोले जा रहे डायलॉग को सुनकर आनंद ले रहे हैं |

निर्धारित बक्त के बाद सभी बच्चे अपनी अपनी क्लास में चले जाते  हैं   इस तरह पहले दिन की प्रेक्टिस पूरी होती है और सभी को अगले दिन निर्धारित समय पर पहुचने की हिदायत दी जाती है |कहते है जब किसी के आकर्षण में कोई बधता है तो फिर हर समय बस यूं ही लगता है कि वो आँखों के सामने ही रहे ऐसा ही अब हरी और उमा के साथ हो रहा था हालांकि उमा हरी से दो साल सीनियर है फिर भी थोड़े से एक साथ बिताए  गए समय ने दोनों को बहुत नजदीक ला दिया है |

स्कूल की छुट्टी फिर वही घर जाना पढ़ना ,खेलना  और सोना यही तो स्कूल जाने बाले बच्चों का रूटीन है |हरी को तो बस  सुबह का   इंतजार  है कब सुबह हो और वह उमा के साथ प्रेक्टिस करे और दिन की अपेक्षा हरी आज और जल्दी सुबह को उठकर तैयार हो जाता है और स्कूल को  जाता है आज उसे स्कूल गेट तो खुला मिला  ही साथ में उमा और मानवी भी गेट के आगे खड़े मिले तीनों स्कूल के अंदर प्रवेश करते है इससे आगे की कहानी अगले भाग में –

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