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सफर के आखरी शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं ..

Byuser

Apr 7, 2021

ये  कहानी  प्यार के ऐसे अनोखे प्रेमियों की कहानी जो कभी साथ ना रहे  लेकिन उनका प्रेम वर्षों  लगातार चला  , फिर एक दिन एक ने क्यों कहा- आखरी सफर के  शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं .. –

एक साधारण सा  दिखने बाला  बालक दो बददियों का थैला लटकाए कक्षा 9 th के सेक्शन a में प्रवेश करता है ,टांगों में एक पैजामा ऊपर पीले रंग की एक सूती कमीज यही उसका लिबास था |उसने क्लास में प्रवेश करने से पहले टीचर को मे आई कमिन सर कहा तो टीचर के साथ क्लास में बैठे सभी क्षात्रो की नजर भी क्लास के गेट की ओर हो जाती है उसकी वेश भूषा देखकर सभी बच्चे जोर से हंस पड़ते हैं |

टीचर ने एस कम इन कहकर उस बच्चे को क्लास के अंदर बुलाया ,उसने  चारों ओर क्लास में नजर डाली और एक खाली पड़ी बेंच पर जाकर अपना थैला रख दिया इसके बाद टीचर की तरफ मौन, एकटक देखा मानो पूछ रहा हो कि सर क्या में बैठ जाऊँ |टीचर भी जैसे समझ गए की शायद ये बैठने की मौन परमिशन मांग रहा है |

टीचर ने उसे बैठने को कहा साथ ही उसे अपना परिचय देने को कहा  |उस लड़के ने  थोड़ा झिजकते हुए कहा सर ,मेरा नाम हरी है ,मेरा आज ही इस स्कूल में एडमिसन हुआ है ,इसलिए क्लास में आने में देर हो गई | कल से सही समय पर आ जाऊंगा |टीचर ने कहा ठीक है कल से सही समय पर आ जाना और स्कूल की यूनिफॉर्म भी सिलबा  लेना |

एक दो पीरियड जाने के बाद एक खाली पीरियड आया तो सभी लड़के आपस में काना फुंसी  करते और ठहाके लगाकर हँसते ,आज सभी की बातों का केंद्र विंदु हरी ही था दरअसल हरी एक गाँव से शहर में एडमिशन कराकर आया था और उसके  घर की माली हालत भी अच्छी नहीं थी जबकि क्लास में बैठे तकरिवन बच्चे अच्छे घर परिवार से थे |हरी की इसी साधारण लिवास की चर्चा कर सभी बच्चे उसका मजाक बना रहे थे |

अगले पीरियड में मेथ  के टीचर आते हैं और गेट के वाहर खड़े होकर बच्चों का हरी को केंद्रविंदु बनाकर मजाक बनते  हुए सुन लेते हैं ये वही सर हैं जिन्होंने दाखिला से पहले हरी का मेथ का टेस्ट लिया था और हरी ने सारे सवालों के जबाब बिल्कुल सही दिए थे इसीलिए उन्होंने प्रधानाचार्य से हरी का ऐडमिसन करने की स्पेसल सिफारिश की थी |

क्लास में टीचर के आने के बाद सभी बच्चे खड़े होकर मास्टर जी का अभिवादन  करते हैं |मास्टर जी उन्हें बेठने को कहते हैं साथ ही  सभी को हिदायत देते हैं कि किसी को भी दूसरे की वेश भूषा को लेकर मजाक नहीं बनाना चाहिए बल्कि हमे हर हालत में एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए |इंसान की पहचान उसके गुण अबगुण देखकर की जाती है ना की उसकी बाहरी अबस्था देखकर ,मास्टर जी की बात कुछ बच्चे समझे और कुछ ने समझकर भी मुहँ बना लिया | इस तरह हरी का स्कूल में पहला दिन निकलता है इसके आगे की कहानी  आखरी सफर के शिखर पर अकेले ,मंजूर नहीं .. -भाग –   2 – पढना ना भूलें -|

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