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आखरी सबक बाकी है

Byuser

Jul 12, 2021

एक राजा का लड़का था |राजा ने उसे गुरुकुल में दीक्षा के लिए सबसे अच्छे गुरु की देख रेख में छोड़ दिया | गुरूजी ने उसे एक राजा को जो बिधा या अनुशाशन देना चाहिए था बो दिया | सभी प्रकार के अस्त्र शस्त्र की विधा भी दी गई | इस तरह कई वर्षों की कठोर शिक्षा देने के बाद गुरूजी उसे लेकर राजदरवार  पंहुचे | जिस समय गुरूजी वहां पंहुचे राजा का दरवार लगा हुआ था | राजा ने गुरूजी को ससम्मान बैठने के लिए आसान दिया और पूछा महाराज ये बताइये कि हमारे युबराज को सभी विधाएँ ठीक से मिली है नहीं | गुरूजी ने कहा राजन युबराज को बो सभी विधाएँ प्रदान की गेन हैं जो एक होने बाले राजा में होनी चाहिए लेकिन अभी भी एक ऐसी विधा है जो युबराज को देनी रह गई है | राजा ने कहा महाराज जब युबराज की अभी शिक्षा पूरी ही नहीं हुई है तो आप इसे गुरुकुल से क्यों निकाल लाये | गुरूजी बोले राजन जो शिक्षा युबराज को देनी बाकि रह गई है वह गुरुकुल में नहीं बल्कि यंहा यानि की राजदरवार में ही दी जा सकती है | राजा के साथ सभी दरवारी भी सोच में पड गए भला ऐसी कोन सी विधा है जो सिर्फ राजदरवार में ही दी जा सकती है | राजा ने कहा महाराज यदि यहाँ शिक्षा देनी ही जरुरी है तो आप उसे पूरा करें ताकि हमारे युबराज किसी भी तरह किसी शिक्षा से अनभिज्ञ न रह जाएँ | गुरूजी बोले महाराज इसके लिए मुझे एक वेंत की आवश्यकता है | राजा ने तुरंत ही एक बेंत गुरूजी को उपलब्ध करा दिया | गुरूजी ने वो बेंत उठाया और  अपने पास खड़े युबराज के पीछे जोर से जड़ दिया | ये दृश्य देखकर सभी दरवारियों के साथ राजा भी हतप्रभ रह गया साथ ही उन्हें गुरूजी पर गुस्सा भी बहुत आया | इस घटना से स्वयं युबराज भी गुस्से से तिलमिला उठे लेकिन गुरूजी को किसी ने कुछ नहीं कहा अलवत्ता राजा ने पूछा महाराज आपने ऐसा क्यों किया आप इसे कोन  सी शिक्षा देने बाले थे  | गुरूजी बोले महाराज यही मेरी अंतिम शिक्षा देनी बाकि थी जो अब पूरी हुई ये शिक्षा मैंने भरे दरवार युबराज को इसलिए दी है कि भविष्य में जब कभी युबराज किसी के साथ न्याय करेंगे तो सजा निर्धारित करते समय वे आज की शिक्षा को याद रखें कि  निर्दोष को सजा देना उसको कितना कष्ट पंहुचाता है | गुरु जी की बात सभी की समझ में आ गई सभी ने गुरूजी को युबराज को अच्छी शिक्षा दिए  लिए धन्यबाद कहा | वहीँ राजा ने खुश होकर गुरूजी को कई अमूल्य भेंट प्रदान कीं | 

कहानी से शिक्षा :- जो जिस परेशानी से गुजर चूका हो वो ही दूसरे की परेशानी को समझ सकता है यानि कि जिसके फटी न पैर विवाहीं वह क्या जाने पीर पराई | 

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