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आदमी की पहचान उसकी बोली से हो जाती है

Byuser

Jul 7, 2021

एक राजा अपने साथियों के साथ जंगल में शिकार खेलने गए | उसी जंगल में सूरदास जी भी भगवन भजन में तल्लीन थे | एक हिरन का पीछा करते हुए राजा आगे बढ़ रहे थे कि हिरन उनकी आँखों से ओझल हो गया | राजा जब सूरदास की कुटिया के पास से गुजरे तो उन्होंने बड़े आदर और मीठे स्वर के साथ पूछा महाराज जी इधर से कोई हिरन भागता हुआ तो नहीं निकला | सूरदास ने उत्तर दिया नहीं राजन इधर से किसी के जाने की आहट सुनाई नहीं दी | राजा उत्तर पाकर आगे बढ़ गया | थोड़ी देर के बाद उधर से राजा का मंत्री गुजरा और उसने भी सूरदास जी से पूछा -महाराज इधर से कोई हिरन भागते हुए तो नहीं निकला | सूरदास जी ने उत्तर दिया नहीं दीवान जी इधर से तो किसी के जाने की आहट सुनाई नहीं दी | थोड़ी देर पीछे सूरदास जी की कुटिया के पास हवलदार आया और उसने रॉब से पूछा क्यों सूरदास इधर से कोई हिरन तो नहीं गया | सूरदास जी ने उत्तर दिया नहीं हबलदारजी इधर से तो किसी के जाने की आहट सुनाई नहीं दी | अंत में सूरदासजी की कुटिया पर सिपाही आया और उसने पूछा क्यों वे अंधे इधर से कोई  हिरण तो ना निकला | सूरदासजी ने उत्तर दिया नहीं सिपाही जी इधर से तो किसी के जाने की आहट सुनाई नहीं दी | आगे जाकर जब सभी इकठ्ठा हुए तो उन्होंने सूरदास जी के बारे  में एक दूसरे से चर्चा की और उनके ज्ञान पर सभी को बड़ा आश्चर्य भी हुआ ,वे देख नहीं सकते थे फिर भी सभी को आसानी से पहचान लिया | वे सभी लौटकर सूरदास जी की कुटिया में आये और राजा ने बड़े बिनम्र स्वर में पूछा महाराज आप देख नहीं पाते फिर भी आपने हम सभी को कैसे पहचान लिया | सूरदासजी ने कहा मैंने आपको बोली यानि बोलने के ढंग से पहचान लिया |
कहानी से शिक्षा :- बिनम्रता से बात करने से इंसान दूसरे का दिल ही नहीं जीतता बल्कि अपना कद भी ऊँचा कर लेता है | अपने से निम्न इंसान के साथ भी इज्जत से पेश आना चाहिए |

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