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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -9

Byuser

Mar 18, 2021

अब तक आपने पढ़ा राम सभी को, महाजन से अपनी जमीन को एडवांस ठेके पर देकर पैसे लेने का सुझाब देता है जो सभी को पसंद आता है अब आगे –
महाजन से मुलाकात :-
सभी की सहमति के बाद राम और हरी महाजन से मिलने उसके घर की तरफ चल देते हैं महाजन इस समय घर पर ही मौजूद है राम और हरी को आता देख आँगन में दो कुर्सियां डालने के लिए अपने लड़के को कहता है उसी बक्त राम महाजन को बाहर से ही आबाज देता है बो उसे चाचा कहकर पुकारता है और हरी के साथ अंदर आता है महाजन कुर्सियों की तरफ इशारा करते हुए बैठने को कहता है एक दूसरे की कुशल क्षेम पूछने के बाद राम अपने आने का कारण महाजन से कहता है | महाजन कुछ देर सोचता रहता है और कहता है कि देखो राम स्याम के पीछे घर को अच्छे से चलाने की पूरी जिम्मेबारी अब तुम्हारी है तुम दोनों को सोच समझकर चलना होगा बाकि तुम जानो जहाँ तक अगली फसल के लिए जमीन ठेके पर देने की बात है तो में तुम्हें पैसे तो दे दूंगा लेकिन फसल तक के समय का पैसों का व्याज लगेगा | 

महाजन का ब्याज :-

महाजन का ब्याज उस सरकबेल की तरह से है जिसे किसी खाद पानी की आवश्यकता नहीं होती जो प्रतिदिन दिन दूनी रात चौगुनी की तरह बढ़ती जाती है राम और हरी इन सब से अनजान थे कियोकिं इस तरह की परेशानी श्याम के रहते उन्हें कभी आई ही नहीं थी लेकिन स्याम अच्छी तरह जानता था की एक बार जो महाजन के कर्ज के फेर में पड़ा उसका तो फिर भगवान  ही मालिक है लेकिन यहां श्याम तो है नहीं अत:राम और हरी महाजन की बात को सहर्ष मान  लेते हैं और एक निश्चित रकम लेकर घर की तरफ चल देते हैं | 

पूर्वी और माधवी का फिर से फ्जूलखर्ची न करने का इरादा :-

दोनों आकर सारी  रकम फिर से पूर्बी को पकड़ा देते हैं और हिदायत करते हैं कि इस  बार सोचसमझकर पैसों का इस्तेमाल करना नहीं तो आगे कोई उधार देने बाला भी नहीं है दोनों सहमति में गर्दन हिलाती  हैं और आपस में मिलकर निश्चय करती है की इस बार वह किसी भी हालत में अनावश्यक खर्चा नहीं करेंगी पूर्वी उन पैसों में से कुछ पैसे निकलकर हरी को देती हुई कहती है की ये पैसे सामने हलवाई और किराने की दुकान के उधारे के चुकता करने हैं | हरी पैसे लेकर बाहर निकलता है उधर माधवी अपनी दीदी से कहती है की दीदी हमें भी बाजार से घर का जरूरी सामान लेने जाना पड़ेगा रसोई में कुछ भी नहीं बचा है | पूर्वी ठीक है कहकर ,कल चलने की बात कहती है |

अपने इरादे से हुईं बिचलित दोनों बहनें :-

दूसरे दिन दोनों बहनें जल्दी से उठकर रसोई में जो बचा है उसी का नास्ता बनाकर दोनों भाइयों को खिलाकर कहती हैं की हम बाजार जा रहे हैं सामान लाने तब तक तुम घर पर ही रहना राम पूर्वी को कहता है पहले नाश्ता तो कर लो लेकिन पूर्वी और माधवी बिना नाश्ते के ही मार्केट चली जाती हैं दोनों घर का आबश्यक सामान खरीद लेती हैं उसके बाद माधवी कहती है दीदी आज हमने कोई अनावश्यक सामान की खरीदारी नहीं की है चलो अच्छा है इसी तरह पैसे बचाने  पड़ेंगे तभी माधवी कहती है दीदी सुबह नाश्ता नहीं किया तो भूख लग रही है पूर्वी बोली भूख तो मुझे भी लग रही है चलो सामने ही एक बढ़िया रेस्तराँ है वहां चलकर कुछ खाते हैं माधवी जानती थी की वह रेस्तरां बहुत महंगा है किंयोंकी वह एक वार हरी के साथ यहां पहले आ रखी थी फिर भी वह पूर्वी के साथ अंदर चली जाती है दोनों अपनी अपनी पसंद के अनुसार खाने का आर्डर करते हैं | खाने के बाद जब बिल आता है तो पूर्वी स्तब्द्ध रह जाती है यह इतना बिल तो अवश्य था जिससे परिवार में सभी, कई दिनों का खाना खा  सकते थे इस तरह  आज फिर से वह अपने आपको फिजूलखर्ची करने से नहीं रोक पाई | (इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

 

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