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पचास के बाद की पछवा हवा भाग -11

Byuser

Mar 20, 2021

अब तक आपने पढ़ा की पूर्वी और माधवी राम और श्याम को भला बुरा कहती हैं दोनों नाश्ता किये बगैर ही काम की तलाश में घर से निकल जाते हैं | अब आगे –

दोनों भाई घर से निकल कर शहर के पास स्थापित फैक्टरी में जाने का प्लान बनाते हैं इससे पूर्व भी वह वहां जा रखे हैं, उस समय जो काम फैक्टरी मालिक ने उनको करने के लिए कहा था उस काम को अपने लायक न समझकर ठुकरा दिया  था पर आज वही  काम को करने की मजबूरी मानकर दोनों चल देते हैं |

गेट पर खड़े दरवान ने उनको पहचान कर उनसे पूछा आज कौन  सी पोस्ट के लिए आवेदन लेकर आये हो तब राम कहता है कि भाई देखते है आज सेठजी कौन से काम पर रखेंगे |दरवान दोनों की रजिस्टर में एंट्री करता है और उन्हेंअंदर जाने देता है अंदर फेक्टरी मालिक का ऑफिस थोड़े से फासले पर ही था अत ; जल्दी ही दोनों ऑफिस के सामने खड़े हो जाते हैं गेट पर खड़ा  चौकीदार  उनका वायोडेटा लेकर सेठ के पास रख देता है कुछ ही समय में दोनों को अंदर बुला लेता है राम और हरी जाकर अभिवादन करके खड़े हो जाते हैं सेठ सामने पड़ी कुर्सियों पर दोनों को बैठने का इशारा करता है दोनों बैठ जाते हैं ,सेठ दोनों से मुखातिब होकर कहता है कि इससे पहले भी तुम दोनों  यहाँ नौकरी के आवेदन करने आ चुके हो उस समय मैंने तुम्हें हेल्पर की पोस्ट पर काम देने के लिए कहा था मगर तुमने वह काम करने को मना कर दिया था अभी मेरे पास मेरे ऑफिस में दो ऑफिस असिस्टेंट की जगह खाली है यदि तुम चाहो तो वह तुम्हें मिल सकती है तुम दोनों कल से ही काम पर आ सकते हो लेकिन याद रखना यहाँ 12 घंटे की ड्यूटी  है और पूरी ईमानदारी और निष्ठा से ड्यूटी करनी होगी पहले महीने की सेलरी सिकुरिटी के तौर पर जमा रहेगी उसके बाद के महीने से हर महीने की 5 तारीख को नकद सेलरी मिल जाया  करेगी दोनों अपने मनमुताबिक काम मिल जाने से खुश हैं और खुशी -खुशी घर आते हैं पुर्वी और माधवी दोनों के चेहरे की खुशी देखकर समझ जाती हैं की आज इन्हें नौकरी मिल गई है वे दोनों भी अंदर ही अंदर बहुत खुश हैं लेकिन उनके सामने अपनी खुशी तभी जाहिर करने की सोचती हैं जब यकीन हो जाए की वास्तव में इन्हें नौकरी मिल गई है जब दोनों अपनी नौकरी लगने की जानकारी दे देते हैं और सारी बातें तफ़शील से बताते हैं और इतनी  सेलरी मिलेगी जानकर, दोनों की ख़ुशी क ठिकाना नहीं रहता है  |

आज कई दिनों के बाद घर में फिर से ख़ुशी का माहौल बना है पूर्वी इस ख़ुशी को मनाने के लिए हरी को पैसे देती है और कहती है की सामने हलवाई की दुकान से मिठाई लेकर आओ बैठकर खाएंगे इस ख़ुशी को सेलिब्रेट करने का तो हक़ बनता ही है , हरी पैसे लेकर हलवाई की दुकान पर जाता है और उधर माधवी चाय बनाने किचन में जाती है सभी साथ मिलकर खुशी  मनाते हैं इस समय पूर्वी के आलावा सब इस बात से अनजान हैं की पैसों की समस्या कल से फिर शुरू होने वाली है क्योंकि घर में रखे सभी पैसों का हिसाब पूर्वी ही रखती है और उसे पता है की अब उसके पास रखे सभी पैसे खर्च हो चुके हैं ये अंतिम १०० रूपए थे जो वह हरी को दे चुकी है ,लेकिन वह  इस समय यह सोचकर सहज है कि अब तो इनकी नौकरी लग ही गई है कंही न कंही से कोई इंतजाम हो ही जायेगा वो नहीं चाहती की इस वावत वो कोई चर्चा करके इस ख़ुशी के माहौल को ख़राब करे | (इससे आगे की कहानी अगले भाग में )

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